हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि एचएनबी गढवाल विवि की प्रो. सुनीता गोदियाल ने किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के अध्यापकों के लिए आवश्यक है कि वे तकनीकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर छात्रों को प्रशिक्षित करें। हमारे शिक्षकों को ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों पद्धतियों में पढ़ाने में सक्षम होना चाहिए।

प्रो. सुनीता ने कहा कि यदि शिक्षक वर्तमान में प्रचलित तकनीकी में अपडेट नहीं होंगे तो वे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर हो रहे अनुसंधानों को समझ नहीं पाएंगे। संस्कृत विवि में बीएड विभाग के अध्यक्ष डा. अरविंद नारायण मिश्र ने कहा की वर्तमान में तकनीकी प्रशिक्षण संस्कृत शिक्षकों एवं छात्रों के लिए आवश्यक है। जिससे उनके शिक्षण एवं संप्रेषण कौशल का विकास संभव होगा। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय देहरादून के प्रो. सुशील चंद्र डिमरी ने कहा कि संस्कृत कंप्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है। संस्कृत में अपार ज्ञान राशि विद्यमान है।

जिसे तकनीकी के माध्यम से संस्कृत न जानने वाले लोगों तक पंहुचाया जा सकता है। विवि के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय में संस्कृत शिक्षकों एवं शोध छात्रों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला का प्रोजेक्ट केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला के समन्वयक एवं परियोजना प्रभारी डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट ने बताया कि कार्यशाला में देशभर से अनेक विश्वविद्यालयों के 80 शिक्षक एवं शोध छात्र प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष डा. शैलेश कुमार तिवारी ने की।

इससे पूर्व विश्वविद्यालय में वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मिश्र ने वैदिक मंगलाचरण किया। डा. विन्दुमती द्विवेदी ने अतिथियों का आभार प्रकट किया। संचालन कार्यशाला की संयोजक मीनाक्षी सिंह रावत ने किया। इस अवसर पर डॉ. द्वारिका प्रसाद नौटियाल, नरेश भट्ट, भगवती प्रसाद, डॉ. मनीष चांडक, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. सुशील चमोली आदि मौजूद रहे।