भारत का स्वरूप केवल भौतिक विकास से परिभाषित नहीं किया जा सकता, बल्कि इसकी आध्यात्मिक ज्ञान-परंपरा, वेद, उपनिषद, संस्कृत साहित्य और व्याकरण ही इसकी आत्मा है: शतपथी
बहादराबाद, हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं साहित्य अकादमी नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आये संस्कृत के युवा लेखकों ने अपनी रचनाओं और शोध पत्रों के वाचन का अद्भुत प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया। ‘विकसित भारत के निर्माण में संस्कृत के युवा लेखकों का योगदान’ विषय […]
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