आधी आबादी तो ऐसा ब्लाऊजपीस दान में देती है कि इमरजेंसी पड़ जाए और छन्नी ना मिले तो चाय भी छन जाए, शुक्लाइन चाची की कहानियों का स्वर और स्वाद

शुक्लाइन चाची की कहानियों का स्वर और स्वाद –दयानंद पांडेय जैसे कोई शिक्षक किसी छात्र की ग़लती पर पतली सी छड़ी सटाक से मार दे। माधुरी महाकाश की कहानियां ऐसे ही सटाक से छड़ी मारती चलती हैं। सटाक-सटाक ! ज़रा-ज़रा सी बात पर यही ध्वनि। लेकिन जैसे शिक्षक की वह छड़ी छात्र को अच्छे नंबर […]

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आयुर्वेद, योग एवं ध्यान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु डॉ. डी. सी. पसबोला सम्मानित

देहरादून, 1 जुलाई 2026। आयुर्वेद, योग एवं ध्यान के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए डॉ. प्रो. डी. सी. पसबोला को ओबेरोन ग्रुप एलएलपी, पंजाब द्वारा प्रतिष्ठित “आउटस्टैंडिंग मेडिकल ऑफिसर ऑफ द ईयर 2025-26” सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान ओबेरोन ग्रुप एलएलपी, पंजाब के निदेशकों द्वारा आयोजित एक विशेष सम्मान […]

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद और संत समाज का मौन: क्या धर्माचार्यों को आगे आकर सत्य स्पष्ट नहीं करना चाहिए?

अयोध्या का श्रीराम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यह केवल पत्थरों से निर्मित भव्य मंदिर नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष, बलिदान और विश्वास का प्रतीक है। भारत ही नहीं, विश्वभर के सनातन अनुयायियों ने अपनी श्रद्धा से इस मंदिर के निर्माण में योगदान दिया। आज भी प्रतिदिन लाखों […]

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जीव-हत्या धर्म नहीं “जियो और जीने दो” ही सच्ची मानवता……….?

: धर्मेंद्र चौधरी (सामाजिक चिंतक) भारतवर्ष की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक परंपराएँ अपने भीतर गूढ़ विचार, नैतिक मूल्य और सामाजिक रीति-रिवाज लिए हुए हैं। बकरा ईद या ईद-उल-अजहा जैसे त्यौहार सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से समुदायों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। परंतु किसी भी परंपरा को अपनाने से पहले मानवता, करुणा और नैतिकता की कसौटी पर खरा […]

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वैवाहिक जिम्मेदारी और संजीदगी कहाँ खो गई क्या ऐसे ही चलेंगे वैवाहिक रिश्ते ………?

लेखक: धर्मेंद्र चौधरी (सामाजिक चिंतक) हाल ही में लक्सर के पास हुई एक घटना ने हमारी सामाजिक संवेदनाओं और वैवाहिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रज्ञा सिंह नामक युवती, जो अभी-अभी विवाह कर चुकी थी और पति के साथ हनीमून व धार्मिक दर्शन कर वापस लौट रही थी, अचानक ट्रेन से गायब […]

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पत्रकारिता केवल कॉपी-पेस्ट का एक सस्ता और आसान कारोबार?

 -राजेन्द्र सिंह जादौन पत्रकारिता या कॉपी-पेस्ट का कारोबार? आज का दौर ऐसा बन चुका है कि हर गली, हर मोहल्ले और हर चौराहे पर एक “पत्रकार” मिल जाता है। हाथ में मोबाइल, जेब में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक पेज बस, पत्रकारिता शुरू। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सच में पत्रकारिता […]

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भगवान परशुराम का सत्य,अहिंसा,क्षमा और परोपकार युक्त समाज निर्माण उनका लक्ष्य था: डॉ . श्रीप्रकाश मिश्र

भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित द्विदिवसीय जयंती के शुभारंभ अवसर न्याय संवाद कार्यक्रम मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में संपन्न। कुरुक्षेत्र। सृष्टि निर्माण में अवतारों के क्रम में परशुराम जी का अवतार छठे क्रम पर है। सभी अवतारों में परशुराम जी अकेला ऐसा अवतार है जो अक्षय है, अमर […]

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खरात स्कैंडल “ओश्नो जल” वियाग्रा का प्रसाद….. क्या धर्म के नाम पर कुछ भी चलेगा।……….?

-: धर्मेन्द्र चौधरी (सामाजिक चिंतक) “ओश्नो जल” वियाग्रा की कुचली हुई गोलीयों, कफ सिरप और साधारण पानी का वह जहरीला कॉकटेल, कैप्टन अशोक खरात (67 वर्षीय रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी, जिन्होंने खुद को 154 देशों की यात्रा का दावा किया) नें ‘आध्यात्मिक प्रसाद’ और ‘डिवाइन शर्बत’ का ढोंग रचकर नेताओं को शारीरिक-मानसिक गुलामी में जकड़ने […]

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अब कोई महत्व नहीं: नींबू पानी पीते हैं कि व्रत करते हैं कि चंदन कितना बड़ा लेपते हैं या कितने मंदिरों में जाते हैं

–रामेश्वर मिश्र पंकज मोदी जी या किसी भी बड़े राजनेता के बारे में इस तरह के प्रचार का अब कोई महत्व नहीं रह गया है कि वह नींबू पानी पीते हैं कि व्रत करते हैं कि चंदन कितना बड़ा लेपते हैं या कितने मंदिरों में जाते हैं। क्योंकि यह सब चीज तब महत्वपूर्ण है जब […]

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यूजीसी रेगुलेशन: सामाजिक संतुलन या विभाजन की नई रेखा?

-जुगुल किशोर तिवारी “बुंदेला” देश के शैक्षणिक संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं होते, वे समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाले मंच भी होते हैं। ऐसे में जब कोई नया यूजीसी रेगुलेशन लागू होता है, तो उसका प्रभाव केवल कॉलेज-कैंपस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे पर पड़ता है। आज जो […]

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