शोक की परंपरा बनाम राजनीति का लोभ, एक कड़वी सच्चाई………..?
•धर्मेन्द्र चौधरी (सामाजिक चिंतक) किसी अपने की मृत्यु के बाद इंसान टूट जाता है। यह वाक्य केवल शब्द नहीं, बल्कि उस गहन पीड़ा का प्रतीक है जो हृदय को चीर देती है। हिंदू रीति-रिवाजों में मृत्यु को केवल शरीर का अंत नहीं माना जाता, अपितु आत्मा की यात्रा का प्रारंभ। इसलिए तेरह दिनों तक शोक […]
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