मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों के मध्य कार्यक्रम संपन्न

मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया

कुरुक्षेत्र\सैनिक देश की वो ढाल होते हैं, जो देश को हर खतरे से बचाते हैं, सैनिक देश का वो गौरव हैं जो हमेशा देश का अभिमान बनके देश की रक्षा और मान बढ़ाते हैं। अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए बहुत से सैनिक अपने प्राणों तक का बलिदान दे देते हैं और देश के दुश्मनों को मुहतोड़ जवाब देने के लिए हमारे वीर सेनानी हमेशा तैयार रहते हैं। भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस भारतीय सैनिकों के सम्मान एवं स्वाभिमान का दिवस है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों के मध्य आयोजित कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष आचार्य सतीश कौशिक ने संयुक्त रूप से मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों के साथ भारतमाता के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पार्चन एवं दीपप्रज्जवलन से किया।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस भारतीय सैनिकों के निमित्त समाज द्वारा किया जाने वाला एक सेवा यज्ञ है। सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण हेतु कार्य करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक तथा सामूहिक उत्तरदायित्व है। राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले सैनिकों का कल्याण करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सभी का कर्तव्य होना चाहिए। सैनिक राष्ट्र की मूल्यवान संपत्ति और समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सैनिकों की देखभाल को सुनिश्चित करने और उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने के लिए हर साल 7 दिसंबर को भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। सशस्त्र सेना झंडा दिवस देश के नाम अपना जीवन करने वाले दिव्यांग पूर्व सैनिकों, युद्ध में वीर गति प्राप्त किए हुए सैनिकों की विधवाओं, शहीदों के परिवार जनों की देखभाल करने के लिए मदद सुनिश्चित करता है और उनके प्रति हमारी प्रतिबद्धता और सम्मान का प्रतिक है। सशस्त्र सेना झंडा दिवस को मनाने के लिए, भारतीय सशस्त्र बलों की सभी तीन शाखाएं भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि भारत को आजादी मिलने के बाद 28 अगस्त 1949 को भारत सरकार ने भारतीय सेना के जवानों के कल्याण के लिए एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने 7 दिसंबर को झंडा दिवस मनाने के लिए चुना। जवानों के कल्याण के लिए धन जमा करने के लिए समिति ने लोगों के बीच छोटे झंडे बांटकर, उससे चंदा इकठ्ठा किया। इस झंडे में तीन रंग थे लाल, गहरा नीला और हल्का नीला। ये रंग तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करते हैं। सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर जमा किए गए धन के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। पहला युद्ध के समय हुई जनहानि में सहयोग, दूसरा सेना में कार्यरत कर्मियों और उनके परिवार के कल्याण में सहयोग, तीसरा सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवार के कल्याण के लिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य सतीश कौशिक ने कहा कि सैनिक किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति में से एक हैं। सैनिक हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, उनकी भलाई के लिए कार्य करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हम सभी का परम कर्तव्य होना चाहिए। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आचार्य सतीश कौशिक को सामाजिक कार्यों में सराहनीय योगदान के लिए अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थी एवं मिशन के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत गीत एवं प्रेरक प्रसंग सुनाए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् से हुआ। कार्यक्रम में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।