एसएलबीसी की 97वीं बैठक में बैंकिंग सेवाओं, स्वरोजगार योजनाओं और वित्तीय समावेशन की समीक्षा, छह जिलों में विशेष ऋण शिविर लगाने के निर्देश
सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के ऋण-जमा (सीडी) अनुपात को राष्ट्रीय औसत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा। उन्होंने बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और टिहरी जिलों में कम ऋण-जमा अनुपात पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि जिला प्रशासन, लीड बैंक और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से नियमित ऋण शिविर आयोजित करें तथा पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध कराएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी भी पात्र व्यक्ति को अनावश्यक कठिनाई नहीं होनी चाहिए। यदि किसी आवेदन में तकनीकी कमी हो तो उसे निरस्त करने के बजाय आवेदक का मार्गदर्शन कर कमियां दूर कराई जाएं। उन्होंने बैंकों से योजनाओं के पात्र लाभार्थियों तक सक्रिय रूप से पहुंचने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वार्षिक ऋण योजना के तहत लगभग 96 प्रतिशत तथा एमएसएमई क्षेत्र में 111 प्रतिशत उपलब्धि राज्य की आर्थिक प्रगति का सकारात्मक संकेत है। हालांकि ऋण-जमा अनुपात में सुधार हुआ है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने के लिए सभी बैंकों को समन्वित प्रयास करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-2.0, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम-स्टे योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना तथा किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं में पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पर्यटन तथा स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्यमों को बैंकिंग सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंचाई जाएं तथा वित्तीय समावेशन को मजबूत करते हुए प्रधानमंत्री जनधन योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार तथा बैंक मिलकर रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति दे सकते हैं।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए हेल्पलाइन 1930 से भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों को जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, विभिन्न बैंकों तथा उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

