देहरादून। विधानसभा में बैकडोर से हुई नियुक्ति में बर्खास्त कर्मचारियों ने कहा है कि उन्हें कार्य से हटाया जाना पूर्ण रूप से गलत है। कहा कि कोटिया कमेटी ने इस मामले में विधिक राय स्वयं क्यों नहीं ली। आज परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कौशिक बैसोड़ा ने कहा है कि कोटिया कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 से 2022 तक की सभी नियुक्तियां एक ही पैटर्न पर तथा एक जैसी ही प्रक्रिया के तहत हुई हैं तो सवाल यह उठता है कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सिर्फ 2016 के उपरांत नियुक्त कार्मिकों की ही सेवायें समाप्त क्यों की गई? यह भेदभावपूर्ण कार्रवाई है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन भी है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिवालय का उच्च न्यायालय में प्रस्तुत काउंटर एफिडेविट में कहना है कि विधानसभा में राज्य निर्माण से अभी तक हुई सभी नियुक्तियां अनियमित तथा अवैध हैं तो कार्रवाई 2016 के उपरांत नियुक्त कार्मिकों पर ही क्यों की गई है? वर्ष 2016 से पूर्व नियुक्त कार्मिकों को क्यों बचाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि साफ है कि विधानसभा अध्यक्ष उन्हें बचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सवाल उठता है कि जब नियुक्ति अवैध है तो विनियमितीकरण वैध कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह सवाल कोटिया कमेटी पर भी है जो यह तथ्य उजागर नहीं कर सकी और विनियमित हो चुके कर्मचारियों के संबंध में विधिक राय लेने की सलाह दे देती है। कमेटी के तीनों सदस्य रिटायर्ड आइर्दएएस अधिकारी रहे हैं और कार्मिक मामलों के जानकार बताये जा रहे हैं तो यह फाइडिंग देने से उन्होंने परहेज क्यों किया? इस अवसर पर अन्य कर्मचारी भी वार्ता में शामिल रहे।