बेल्जियम की धरती पर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कराया गायत्री दीपमहायज्ञ, एंटवर्प में गूंजा वैश्विक संदेश

उत्तराखंड धर्म हरिद्वार

हरिद्वार।अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पंड्या ने बेल्जियम के ऐतिहासिक नगर एंटवर्प में भव्य गायत्री दीपमहायज्ञ का संचालन किया। विदेशी धरती पर आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान ने भारतीय वैदिक परंपराओं की दिव्यता, सांस्कृतिक गरिमा और अध्यात्म की वैश्विक स्वीकार्यता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम स्थल दीपों की स्वर्णिम आभा और वैदिक मंत्रोच्चार की पवित्र ध्वनियों से आलोकित हो उठा। प्रत्येक दीप मानो विश्वशांति, वैश्विक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का संदेश दे रहा था।
इस अवसर पर बेल्जियम के युवाओं, नर-नारियों तथा अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धाभाव से दीपमहायज्ञ में भागीदारी की और भारतीय संस्कृति, ऋषि परंपरा तथा सनातन जीवन-दर्शन के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि भारतीय अध्यात्म सीमाओं में बंधा नहीं, बल्कि विश्व मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।
दीपमहायज्ञ के दौरान प्रखर विचारक डॉ. पंड्या ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीप केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मपरिष्कार, सेवा और समर्पण का संकल्प है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर के अज्ञान, स्वार्थ और संकीर्णता के अंधकार को दूर कर लोकमंगल की दिशा में अग्रसर होता है, तभी सच्चे अर्थों में दीपयज्ञ की सार्थकता सिद्ध होती है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने विश्वबंधुत्व की भावना को आत्मसात करते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के आदर्श को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। बेल्जियम की भूमि पर आयोजित यह दीपमहायज्ञ भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त उदाहरण बन गया।

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