राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं मानवता के कल्याण हेतु संत समाज का ऐतिहासिक मंथन
हरिद्वार, 18 जून 2026। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट, भूपतवाला में विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संत मार्गदर्शक मण्डल उपवेशन की दो दिवसीय बैठक आध्यात्मिक गरिमा एवं राष्ट्रीय चेतना के वातावरण में प्रारम्भ हुई। देशभर के विभिन्न पीठों, अखाड़ों, सम्प्रदायों तथा आध्यात्मिक परम्पराओं के शीर्षस्थ संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित यह बैठक राष्ट्र जीवन के समक्ष उपस्थित समसामयिक चुनौतियों, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा लोककल्याण के विविध आयामों पर गंभीर चिंतन-मंथन का महत्वपूर्ण मंच बनी।
बैठक में हिन्दू समाज के संगठन, सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन, गौसंरक्षण, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, सेवा कार्यों के विस्तार, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, युवा जागरण, धर्मांतरण की चुनौतियों, राष्ट्रीय एकात्मता तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
संत समाज ने वर्तमान परिस्थितियों का गंभीर विश्लेषण करते हुए समाज को जागरूक, संगठित एवं संस्कारित बनाने के लिए व्यापक जनजागरण को समय की आवश्यकता बताया। अपने उद्बोधनों में संतों एवं धर्माचार्यों ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति में निहित है तथा धर्म, सेवा, संस्कार और समरसता के आधार पर ही राष्ट्र का वास्तविक उत्थान संभव है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को शांति, सद्भाव, करुणा, सह-अस्तित्व और विश्वबंधुत्व का संदेश देने वाली जीवन-पद्धति है। अतः इसके संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को उत्तरदायित्वपूर्वक अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
बैठक में संत समाज ने विश्व हिन्दू परिषद द्वारा सेवा, संगठन एवं संस्कार के क्षेत्र में संचालित विविध आयामों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संत शक्ति एवं सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयास ही राष्ट्रनिर्माण, लोकमंगल और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त आधार बन सकते हैं।
सभी संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त किया कि धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्रहित के लिए संयुक्त रूप से कार्य करते हुए भारत को पुनः विश्व के आध्यात्मिक नेतृत्व के शिखर पर प्रतिष्ठित करने हेतु सतत प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज, महानिर्वाणी पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती महाराज, ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती महाराज, अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वात्मानन्द महाराज, युगपुरुष स्वामी परमानन्द महाराज, निर्मल पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानदेव सिंह महाराज, पूज्या साध्वी ऋतंभरा जी, युधिष्ठिर महाराज (शदाणी दरबार), महाराष्ट्र से स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज, शांतिकुञ्ज हरिद्वार के प्रमुख डॉ. चिन्मय पण्ड्या, साध्वी पूर्णप्रज्ञा जी, गुजरात कर्णावती के देवलाचार्य-अविचलाचार्य महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज, मुम्बई से डॉ. भदन्त राहुल बोधि, महामण्डलेश्वर संतोषी माता, गोवा के पद्मनाभ पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मेशानन्द महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द महाराज सहित देशभर से आए अनेक प्रतिष्ठित संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों ने सहभागिता की।
विश्व हिन्दू परिषद की ओर से अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं केन्द्रीय प्रबन्ध समिति के वरिष्ठ सदस्य दिनेश जी, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) मिलिंद परांडे, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी, क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश विनायक, प्रांत संगठन मंत्री अजय कुमार, क्षेत्र संयोजक (बजरंग दल) अनुज वालिया, बलराम कपूर, सौरभ चौहान सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संत मार्गदर्शक मण्डल की यह बैठक भारतीय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकात्मता तथा वैश्विक मानव कल्याण के प्रति संत समाज की प्रतिबद्धता का सशक्त एवं ऐतिहासिक प्रतीक बनकर उभरी। आध्यात्मिक गरिमा, राष्ट्रभाव और लोकमंगल की भावना से ओत-प्रोत इस उपवेशन से निकले विचार एवं संकल्प समाज जीवन को नई दिशा, नई ऊर्जा और सकारात्मक प्रेरणा प्रदान करने वाले सिद्ध होंगे।

