दुर्गाष्टमी एवं महानवमी पर राशि के अनुसार करें कन्या पूजन और दान
व्रत एवं त्योहारों की तिथियों को लेकर कई बार असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि पर्व किस दिन मनाया जाए और व्रत कब रखा जाए। आश्विन शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्तूबर, रविवार से हुआ था। कन्या पूजन, देवी दुर्गा की साख के विसर्जन और व्रत पारण के साथ नवरात्रि का समापन होगा।
श्रीदुर्गाष्टमी, श्रीदुर्गा नवमी एवं विजयदशमी (दशहरा) की तिथियों के संबंध में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्तूबर, 2026 को प्रातः 8 बजकर 29 मिनट पर प्रारंभ होगी तथा 19 अक्तूबर को प्रातः 10 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी।
इसी प्रकार, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्तूबर, 2026 को प्रातः 10 बजकर 53 मिनट पर प्रारंभ होकर 20 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी।
सूर्योदय व्यापिनी अष्टमी 19 अक्तूबर को तथा सूर्योदय व्यापिनी नवमी 20 अक्तूबर को है।
अष्टमी और नवमी का व्रत, पूजन, साख विसर्जन एवं कन्या पूजन कब करें?
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि जो श्रद्धालु अष्टमी के दिन व्रत, पूजन, साख विसर्जन एवं कन्या पूजन करना चाहते हैं, वे 19 अक्तूबर, सोमवार को ये धार्मिक कार्य कर सकते हैं। वहीं, नवमी के दिन व्रत, पूजन, साख विसर्जन एवं कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु 20 अक्तूबर, मंगलवार को ये अनुष्ठान कर सकते हैं।
देवी दुर्गा के कुछ भक्त अष्टमी को, जबकि कुछ नवमी को साख विसर्जन एवं कन्या पूजन करते हैं। यदि किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर ये धार्मिक कार्य संपन्न न हो सकें, तो संबंधित धार्मिक परंपरा एवं पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि पर भी साख विसर्जन एवं कन्या पूजन किया जा सकता है।
विजयदशमी का पर्व 20 अक्तूबर को मनाया जाएगा। शस्त्र पूजन का समय 20 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 52 मिनट के बाद करना शुभ होगा।
नवरात्रि के नौ दिनों में उपयोग की गई पूजा सामग्री, कलश, परात में बोए गए ज्वार के अंकुर अर्थात देवी दुर्गा की साख, मिट्टी तथा अन्य पूजन सामग्री का विसर्जन निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार उचित स्थान पर करना चाहिए। इन्हें तालाबों या नदियों में प्रवाहित करने से बचना चाहिए। साख एवं पूजन सामग्री के साथ पॉलीथीन का प्रयोग बिल्कुल न करें, ताकि जल प्रदूषण को रोका जा सके।
कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीन से नौ वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। कन्या पूजन को नवरात्रि के अनुष्ठान का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद कन्याओं का पूजन कर उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराते हैं।
नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की परंपरा है। कन्या पूजन से पहले कन्याओं के पैर स्वच्छ जल से धोए जाते हैं। इसके बाद उन्हें तिलक लगाया जाता है और मौली बांधी जाती है।
इस अवसर पर घरों में खीर, पूड़ी, हलवा और काले चने तैयार किए जाते हैं। कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराने के बाद उन्हें उपहार या दक्षिणा भेंट की जाती है तथा उनके आशीर्वाद प्राप्त किए जाते हैं।
कन्याओं से इन मंत्रों द्वारा करें प्रार्थना
मंत्र 1
मन्त्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्।
नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्॥
मंत्र 2
जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरूपिणि।
पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥
कन्या पूजन के नौ मंत्र
1. ॐ कुमार्यै नमः।
2. ॐ त्रिमूर्त्यै नमः।
3. ॐ कल्याण्यै नमः।
4. ॐ रोहिण्यै नमः।
5. ॐ कालिकायै नमः।
6. ॐ चण्डिकायै नमः।
7. ॐ शाम्भव्यै नमः।
8. ॐ दुर्गायै नमः।
9. ॐ सुभद्रायै नमः।
नवरात्रि में राशि के अनुसार करें कन्याओं को दान
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि दान भारतीय धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। मान्यता है कि श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति का माध्यम बनता है। अष्टमी एवं नवमी के दिन कन्या पूजन के अवसर पर श्रद्धालु अपनी चंद्र राशि के अनुसार निम्नलिखित वस्तुओं में से किसी एक का दान कर सकते हैं।
मेष राशि : लाल वस्त्र, लाल रुमाल, लाल कंगन, राजमा, गुड़, नारियल, घी, केसर अथवा 21 रुपये भेंट कर सकते हैं।
वृष राशि : चांदी के आभूषण, आटा, चीनी, चावल, दूध अथवा सफेद वस्त्र भेंट कर सकते हैं।
मिथुन राशि : हरे रंग के वस्त्र, कांसे के बर्तन, मूंग की दाल, घी अथवा हरे फल भेंट कर सकते हैं।
कर्क राशि : चांदी की वस्तु, जैसे थाली, गिलास या चम्मच, चावल, मिश्री, सफेद वस्त्र अथवा दूध भेंट कर सकते हैं।
सिंह राशि : सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन, गुड़, घी, माता की लाल चुनरी, केसर अथवा 11 रुपये भेंट कर सकते हैं।
कन्या राशि : हरे रंग के वस्त्र, चांदी के सिक्के अथवा पुस्तकें भेंट कर सकते हैं।
तुला राशि : सफेद रंग के वस्त्र, कपड़ा, चावल अथवा आटा भेंट कर सकते हैं।
वृश्चिक राशि : माता की लाल चुनरी, लाल वस्त्र, गुड़ अथवा घी भेंट कर सकते हैं।
धनु राशि : पीले रंग के वस्त्र, कांसे के पात्र, हल्दी, घी अथवा केले भेंट कर सकते हैं।
मकर राशि : चांदी के सिक्के, लोहे की वस्तु, नीले रंग के वस्त्र अथवा तेल भेंट कर सकते हैं।
कुंभ राशि : चांदी के कंगन अथवा नीले रंग के वस्त्र भेंट करना शुभ माना जाता है।
मीन राशि : पीले रंग के वस्त्र, सोने के आभूषण अथवा हल्दी भेंट कर सकते हैं।
उपरोक्त सभी वस्तुओं का दान करना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, सुविधा एवं सामर्थ्य के अनुसार इनमें से किसी एक वस्तु का दान भी कर सकते हैं। दान में वस्तु के मूल्य से अधिक महत्व श्रद्धा एवं सेवा-भाव का है।
नवरात्रि व्रत का पारण
कन्या पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। व्रत खोलने की इस प्रक्रिया को व्रत पारण कहा जाता है। श्रद्धालुओं को अपनी पारिवारिक परंपरा, धार्मिक मान्यताओं तथा पंचांग के अनुसार उचित समय पर व्रत का पारण करना चाहिए।
महंत रोहित शास्त्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ कन्या पूजन, जरूरतमंदों की सहायता और पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प लें।
महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)
अध्यक्ष, श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट (पंजीकृत)
रायपुर ठठर, बनतालाब, जम्मू-कश्मीर – 181123।
संपर्क सूत्र : 9858293195, 7006711011, 9796293195
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