अब कोई महत्व नहीं: नींबू पानी पीते हैं कि व्रत करते हैं कि चंदन कितना बड़ा लेपते हैं या कितने मंदिरों में जाते हैं

राजनीति राष्ट्रीय

रामेश्वर मिश्र पंकज

मोदी जी या किसी भी बड़े राजनेता के बारे में इस तरह के प्रचार का अब कोई महत्व नहीं रह गया है कि वह नींबू पानी पीते हैं कि व्रत करते हैं कि चंदन कितना बड़ा लेपते हैं या कितने मंदिरों में जाते हैं।

क्योंकि यह सब चीज तब महत्वपूर्ण है जब इन्हें करने वाला निश्चित रूप से धार्मिक हो और सनातन धर्म से प्रेम करें ।हिंदू समाज का उत्कर्ष चाहे ।
यह बहुत ही अप्रिय सत्य है परंतु प्रमाणित तथ्य है कि भाजपा भी हिंदू समाज को बांटने वाली नीतियों पर उत्साह से दौड़ रही है ।

जो कुछ एकता का काम वे कर रहे हैं वह ऐसा लगता है कि किसी विवशता में है ।

जैसे जवाहरलाल नेहरू पक्के कम्युनिस्ट झुकाव वाले थे और वर्ग संघर्ष चाहते थे परंतु उस समय हिंदू समाज बहुत संगठित था और उनका संबंध मुख्यतः ब्राह्मणों तथा अन्य द्विजों से ही अधिक था तो निजी संपर्क और उनके निजी संकोच में उन्होंने कभी भी खुलकर कोई ब्राह्मण विरोधी कदम नहीं उठाया । बस,धीरे-धीरे नीतियां बनाते रहे।

ऐसा लगता है कि मोदी जी का संबंध निजी तौर पर मुलायम यादव लालू यादव या नीतीश आदि ऐसे लोगों से है जो हिंदू समाज से विद्वेष करते हैं और उसे तोड़ना चाहते हैं
जिन्होंने लोहिया से केवल जातिवाद का जहर सीखा है । साथ ही जो मजहबी उन्माद को संरक्षण देते हैं।

उनको प्रसन्न करने के लिए ही मोदी जी बहुत सी नीतियां बना रहे हैं।

तो ऐसे में उनके नींबू पानी पीने, नवरात्रि करने ,तिलक लगाने मंदिर जाने का वास्तविक हिंदू धर्म और हिंदू समाज के लिए कोई अर्थ और महत्व नहीं है ।

उनके शरीर को इससे जो लाभ होता होगा वह अवश्य होगा और भगवान करे उनका शरीर खूब स्वस्थ रहे ।
वह दीर्घजीवी हो ।प्रधानमंत्री बने रहें।
हो सकता है कि जगदंबा उनको सद्बुद्धि भी दे ।
लेकिन इतने वर्षों से वह नवरात्रि कर रहे हैं और अगर मैया ने उनको सद्बुद्धि नहीं दी , दुर्बुद्धि ही दी है इस विषय में तो फिर वह उनके किन्हीं दोषों का उदय है ।
लगता है वे दोष बहुत गहरे और भारी है कि जगदंबा अभी तक उन पर द्रवित नहीं हुई ,उनको यह सद्बुद्धि नहीं दी कि बेटा अपने धर्म से प्रेम कर ,अपने समाज से प्रेम कर , तोड़ने वाली नीतियां मत बना ।
इसलिए कृपा करके यह नींबू पानी का गाना ज्यादा मत गाइए।

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