खरात स्कैंडल “ओश्नो जल” वियाग्रा का प्रसाद….. क्या धर्म के नाम पर कुछ भी चलेगा।……….?

राष्ट्रीय

-: धर्मेन्द्र चौधरी (सामाजिक चिंतक)

“ओश्नो जल” वियाग्रा की कुचली हुई गोलीयों, कफ सिरप और साधारण पानी का वह जहरीला कॉकटेल, कैप्टन अशोक खरात (67 वर्षीय रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी, जिन्होंने खुद को 154 देशों की यात्रा का दावा किया) नें ‘आध्यात्मिक प्रसाद’ और ‘डिवाइन शर्बत’ का ढोंग रचकर नेताओं को शारीरिक-मानसिक गुलामी में जकड़ने का सबसे खतरनाक हथियार बनाया। 18 मार्च 2026 को नासिक क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने उन्हें उनके मिरगांव (सिन्नर तालुका) फार्महाउस से गिरफ्तार किया, रात में ‘चोर-चोर’ का शोर मचाकर अफरा-तफरी पैदा की, फिर बेडरूम में घुसकर सीधे अंदर से पकड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया की 20 मार्च 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बम फूटा: खरात कनाडा कॉर्नर के ‘ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स’ ऑफिस में कफ सिरप में पानी और वियाग्रा की गोली कूट-कूटकर ‘ओश्नो जल’ के नाम से तैयार करता था, जिसे वह ‘प्रसाद’ बताकर बेचता थे। नेता गाड़ियां और हेलीकॉप्टर भेजकर “प्रसाद” मंगवाते थे, क्योंकि यह Sexual arousal ‘ऊर्जा और जिंदादिली’ का भ्रम देता था, लेकिन असल मकसद था नेताओं को वियाग्रा की लत और मानसिक निर्भरता में फंसाकर अपना ‘साइड’ चरित्र बना लेना, ताकि सत्ता का हर फैसला उनके इशारे पर हो।

यह पूरा नेटवर्क ड्रग्स, सम्मोहन, ब्लैक-मैजिक (महाराष्ट्र ब्लैक मैजिक एक्ट 2013 के तहत केस) और राजनीतिक वरदहस्त का घिनौना त्रिकोण था, जिसने खरात को महाराष्ट्र की सत्ता के बीच एक ‘साइड’ पावर सेंटर बना दिया। अंजली दमानिया के खुलासे के मुताबिक, “ओश्नो जल” हर पार्टी के नेताओं तक पहुंचता था, तिरुपति बालाजी ट्रस्ट का एक विश्वस्त, मुंबई का एक डिप्टी कलेक्टर (जो खरात को पैसा भी देता था) और यहां तक कि शिर्डी-सिन्नर के प्रभावशाली लोग भी शामिल थे। खरात श्री शिवनिका संस्थान (या श्री ईशानेश्वर महादेव टेम्पल ट्रस्ट) के चेयरमैन था, जिसका मंदिर मिरगांव की पहाड़ियों में है और जहां 2022 में तत्कालीन सीएम एकनाथ शिंदे ने अपनी पत्नी, राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विके पाटील और प्राथमिक शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर के साथ दौरा किया, गौशाला निर्माण के लिए दान भी दिया। 58 से ज्यादा अश्लील वीडियो (पेन ड्राइव पर), हिडन कैमरे, पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए, महिलाओं को ‘योनि शुद्धि’ या ‘समस्या समाधान’ के नाम पर ड्रग्स देकर यौन शोषण किया। खरात ने खुद को ‘भगवान का अवतार’ और न्यूमेरोलॉजिस्ट बताकर सत्ता के गलियारों में ‘साइड’ शैडो फिगर बना लिया, जहां बिना उनके ‘प्रसाद’ के कोई नेता ‘पूर्ण’ महसूस नहीं करता था।

खरात का मकसद बिल्कुल स्पष्ट और शैतानी था, “ओश्नो जल” के जरिए नेताओं को शारीरिक रूप से उत्तेजित और मानसिक रूप से कमजोर बनाकर कंट्रोल स्थापित करना, जबकि महिलाओं को पति की मौत का भय, हिप्नोसिस और ‘ब्लैक मैजिक’ के जाल में फंसाकर बार-बार यौन शोषण का शिकार बनाता। FIR के मुताबिक, 2022 से दिसंबर 2025 तक एक 35 वर्षीय महिला को ‘आध्यात्मिक अनुष्ठान’ के बहाने नशीला पेय (इंटॉक्सिकेंट ड्रिंक) पिलाकर सम्मोहित किया, फिर शुरू हुआ बलात्कार और ब्लैकमेल का सिलसिला। पुलिस को 58 महिलाओं के अश्लील वीडियो मिले, उसके ऑफिस में हिडन कैमरे लगे थे, गिरफ्तारी के वक्त पिस्तौल-कारतूस बरामद हुआ। महिलाओं को मंदिर या ऑफिस बुलाकर ‘प्रसाद’ के नाम पर वही “ओश्नो जल” दिया जाता, जो पुरुष नेताओं को ‘ताकत’ देता था, लेकिन महिलाओं के लिए यह शोषण का जाल। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रूपाली चाकणकर खुद इस ट्रस्ट की ट्रस्टी हैं, अशोक खरात का पैर धोते और छाता थामते वीडियो वायरल हो चुका है। यह ‘महाराष्ट्र का एपस्टीन’ स्कैंडल है, जहां धर्म की आड़ में ड्रग्स-सेक्स-राजनीति का त्रिकोण चलता रहा और खरात को सालों तक अजेय बनाए रखा।

अंजली दमानिया ने साफ कहा, ‘खरात व्हायग्राचे जल बनवायचा, हे राजकारणी घ्यायचे’ और ‘यह महाराष्ट्र का एपस्टीन है’। नेता गाड़ियां-हेलीकॉप्टर भेजते थे क्योंकि यह ‘प्रसाद’ उन्हें ‘जादुई ताकत’ देता था, लेकिन असल में यह लत और कंट्रोल का हथियार था। महायुति के बड़े नेता शिंदे, विके पाटील, केसरकर तक मंदिर पहुंचे, रूपाली चाकणकर ट्रस्टी हैं। कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी ने इसे ‘महाराष्ट्र का आसाराम बापू’ और ‘एपस्टीन फाइल्स’ करार दिया। क्या संयोग है कि महायुति सरकार के शीर्ष नेता इस ‘भोंदू बाबा’ के दरबार में हाजिरी बजाने जाते थे? यह नेटवर्क राजनीतिक वरदहस्त और प्रशासनिक संरक्षण (मुंबई डिप्टी कलेक्टर का फंडिंग आरोप) के बिना नहीं चल सकता था। खरात की 100-200 करोड़ की संपत्ति (62 पानी तक की चर्चा), शिर्डी जमीन हड़पने का आरोप और ड्रग कारोबार, सब साबित करते हैं कि यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सत्ता का गुप्त सहारा था।

खरात की ‘संपत्ति’ और कनेक्शन देखते हुए सवाल उठता है, खरात अकेला था या उसके पीछे पूरा सिंडिकेट? 58 वीडियो में टॉप नेता, महिलाएं और सेलिब्रिटी शामिल हैं, नाम जल्द ही बाहर आने वाले हैं। रूपाली चाकणकर का इस्तीफा ले लिया गया, सुषमा अंधारे, हर्षवर्धन सपकाल, संभाजी राजे, रूपाली थोमरे पाटिल सब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर दबाव बना रहे हैं। गम्भीर सवाल यह है कि SIT रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी? जनता को नाम जानने का हक है। यह स्कैंडल सिस्टम का फेलियर है, जहां धर्म, तंत्र-मंत्र और ब्लैक मैजिक के नाम पर ड्रग्स, यौन शोषण और राजनीतिक ब्लैकमेल फल-फूल रहा है। SIT अब वित्तीय जांच, राजनीतिक कनेक्शन और सभी वीडियो खंगाल रही है। ‘ओश्नो जल’ जैसा ‘प्रसाद’ और ‘योनि शुद्धि’ का बहाना मानवता का अपमान है; खरात को उम्रकैद से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए।

अंजली दमानिया की पत्रकार परिषद ने पूरे महाराष्ट्र को हिला कर रख दिया है, उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘खरात “ओश्नो जल” मधून व्हायग्रा द्यायचे’ और नेता लाइन लगाते थे। अब सरकार को न सिर्फ खरात को सजा देनी है, बल्कि सभी शामिल नेताओं-मंत्रियों-ट्रस्टीज के नाम उजागर करने हैं। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की चेयर परसन को इस्तीफा लेकर हटाया गया, क्योंकि उनका ट्रस्ट से संबंध शोषण को बढ़ावा देता था। अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून, जागरूकता अभियान और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना जरूरी है। वरना ऐसे ‘कैप्टन खरात’ बार-बार उभरेंगे, क्योंकि सत्ता की भूख, कामुकता और ढोंग की जोड़ी हमेशा ढोंगी बाबाओं को संरक्षण देती रहेगी। यह स्कैंडल याद दिलाता है कि सच्ची आध्यात्मिकता कभी नशे, लत या शोषण से नहीं आती, यह सिर्फ तर्क, न्याय और पारदर्शिता से आती है।

अंत में, यह मामला पूरे देश के लिए खतरे की घंटी और चेतावनी है, नेताओं की लाइन लगने वाली ‘ओश्नो जल’ जैसी चीजें समाज को जहर दे रही हैं, अंधविश्वास और सत्ता की मिलीभगत लोकतंत्र को खोखला कर रही है। जनता को अब जागना होगा, वोट देते समय ऐसे ‘साइड’ चरित्रों और उनके राजनीतिक संरक्षकों को पहचानना होगा। सरकार को SIT जांच पूरी तरह पारदर्शी रखनी होगी, सभी के नाम और वीडियो की जांच सार्वजनिक करनी होगी, अंधविश्वास विरोधी कानून सख्त करने होंगे। वरना खरात जैसे विकृत बाबा बार-बार उभरेंगे और धर्म के नाम पर यौनिक, आर्थिक, राजनीतिक शोषण जारी रहेगा। महाराष्ट्र की यह कहानी पूरे भारत के लिए सबक है, अंधविश्वास छोड़ो, scientific temperament, और तर्क अपनाओ, सत्ता को जवाबदेह बनाओ, वरना ऐसे जाल में फंसकर लोकतंत्र और समाज दोनों गंवा दोगे। देश को इंतजार है कि SIT की जांच जल्द पूरी हो और सच्चाई सामने आए, ताकि पीड़िताओं को न्याय मिले।

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