सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की प्रगति की आज समीक्षा की। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में उन्होंने सेंडई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने विभाग का एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा।
समीक्षा बैठक के दौरान श्री सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क आपदाओं से होने वाली जनहानि, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक क्षति तथा बुनियादी सेवाओं और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में एक वैश्विक रूपरेखा प्रदान करता है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के सभी विभागों को अपनी विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी तथा प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी।
श्री सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क की पहली प्राथमिकता आपदा जोखिम को समझना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपदा से संबंधित आंकड़ों का व्यवस्थित संग्रह, विश्लेषण एवं उपयोग अत्यंत आवश्यक है। आपदा जोखिम प्रबंधन के सुदृढ़ीकरण की दूसरी
प्राथमिकता पर उन्होंने कहा कि इसके लिए तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। तीसरी प्राथमिकता आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश के संबंध में उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम कम करने हेतु योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। विकास योजनाओं में आपदा जोखिम मूल्यांकन, मानचित्रण एवं प्रबंधन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा तथा राज्य की महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं और सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियां अपनाई जाएंगी।
चौथी प्राथमिकता आपदा के प्रति तैयारी तथा प्रभावी प्रतिक्रिया एवं पुनर्निर्माण के विषय पर श्री सुमन ने कहा कि आपदा पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को अपनाते हुए भविष्य की आपदाओं के प्रति जोखिम को कम किया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। विभागीय परिसंपत्तियों एवं अवसंरचनाओं पर संभावित खतरों का आकलन, जोखिम कम करने हेतु योजनाओं का विकास एवं क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, प्रशिक्षण, शोध एवं क्षमता विकास को प्राथमिकता दी जाए। सेंदाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य एवं जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी तथा विभागीय समन्वय के माध्यम से एक सुदृढ़ एवं समग्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण तंत्र विकसित किया जाएगा।
बैठक में वरिष्ठ आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डाॅ. पीडी माथुर, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत प्रत्येक विभाग द्वारा विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।सभी प्रमुख आपदाओं के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया एवं कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा। प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी।
इसके अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा । सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को शामिल किया जाएगा। विभागीय परिसंपत्तियों का खतरा, जोखिम, संवेदनशीलता एवं क्षमता आकलन किया जाएगा।
सभी भवनों, संरचनाओं एवं अवसंरचनाओं का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा । सभी परिसंपत्तियों की GIS आधारित मैपिंग कर उन्हें सुरक्षित तथा असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
भवन उपविधि, सुरक्षा मानक, भूमि उपयोग एवं क्षेत्रीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा । भूकंपीय माइक्रो-जोनिंग, बाढ़ एवं भूस्खलन जोनिंग को योजनाओं में शामिल किया जाएगा। राज्य, जिला एवं विभाग स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा। सुरक्षा ऑडिट के आधार पर कमजोर अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्निर्माण किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत सभी नई परियोजनाओं में बहु-आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकों को अपनाया जाएगा। रिटेनिंग वॉल, तटबंध, शेल्टर, बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव किया जाएगा। सभी विभागों द्वारा पूर्व चेतावनी संदेश प्राप्त एवं प्रसारित करने की व्यवस्था की जाएगी। राहत शिविर, सुरक्षित खुले स्थल, निकासी मार्गों की पहचान एवं मैपिंग की जाएगी।


