यूजीसी रेगुलेशन: सामाजिक संतुलन या विभाजन की नई रेखा?
-जुगुल किशोर तिवारी “बुंदेला” देश के शैक्षणिक संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं होते, वे समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाले मंच भी होते हैं। ऐसे में जब कोई नया यूजीसी रेगुलेशन लागू होता है, तो उसका प्रभाव केवल कॉलेज-कैंपस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे पर पड़ता है। आज जो […]
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