हरिद्वार। भोपतवाला स्थित श्री प्राचीन राम मन्दिर में सोमवार को होने वाले महंत की नियुक्ति पर माननीय न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन हरिद्वार ने रोक लगा दी है। पंचपुरीय श्री बैष्णव विरक्त महामण्डल हरिद्वार की ओर की गयी शिकायत पर माननीय न्यायालय ने स्थगनादेश दिया है। इस सम्बन्ध में घनश्याम भवन में महामण्डल के महासचिव महामण्डलेश्वर श्याम दास जी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि बैष्णव आश्रमों एवं मठों के संरक्षण के लिए 1980 में इस संस्था का गठन किया गया,इसके साथ फिलहाल 40 से अधिक आश्रम जुड़े हुए है। श्रीप्रचीन राम मन्दिर भी इससे सम्बद्व है,जहां पर वर्तमान में महंत की नियुक्ति संस्था के माध्यम से ही हुई थी,लेकिन वर्तमान में वहां के महंत रामदास जी ने महामण्डल को विश्वास में लिये बिना अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति करने जा रहे थे,उन्हे रोका भी गया कि महामंण्डल से सहमति ले ले,लेकिन उन्होने सकारात्मक जवाब नही दिया,इसके बाद महामण्डल ने न्यायालय की शरण ली,जहां माननीय न्यायालय ने 17अगस्त को होने वाली नियुक्ति पर रोक लगा दी है। उत्तरी हरिद्वार भोपतवाला स्थित सम्पत्ति प्राचीन राम मंदिर को लेकर न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन हरिद्वार ने वादी संस्था श्री बैष्णव विरक्त महामण्डल के अधिवक्ता के ल गुप्ता के प्रार्थना पत्र पर प्रतिवादी मंहत रामदास शिष्य नारायण दास के विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित किये गए! जिसमें वादी संस्था श्री बैष्णव विरक्त महामण्डल हरिद्वार के प्रार्थना पत्र पर जिसमें प्रतिवादी मंहत रामदास शिष्य नारायण दास द्वारा प्रश्नगत सम्पत्ति का मंहत एवम् प्रबंधक विना वादी संस्था के अनुमोदन के प्रतिवादी को करने का कोई अधिकार नहीं है और प्रतिवादी को भी वादी संस्था द्वारा ही उक्त सम्पत्ति का मंहत नियुक्त किया गया था पंरतु प्रतिवादी मंहत रामदास शिष्य नारायण दास द्वारा बिना वादी संस्था की अनुमति व अनुमोदन के एक निमंत्रण पत्र दिनांक 17/08/2026 के लिए जारी किया गया है और जिसमे प्रश्नगत सम्पत्ति का मंहत एवम् प्रबंधक अपने शिष्य बलराम दास को न्युक्त किये जाने हेतु दृशित किया गया है। जिस पर वादी संस्था द्वारा आपति की गई है। क्योंकि उनके द्वारा कोई अनुमोदन नहीं किया गया है! संस्था के अनुमोदन के बिना निमंत्रण पत्र जारी किये जाने पर आपत्ति की गई है तथा प्रतिवादी द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है और वे बिना संस्था के अनुमोदन के सम्पति का मंहत व प्रबंधक न्युक्त करने पर आमादा है। जबकि प्रतिवादी को इसका कोई अधिकार नहीं है। न्यायालय ने अपने आदेश में प्रतिवादी की अनुपस्थिति रहने की दशा में अपने एक पक्षीय आदेश मे कहा यदि प्रतिवादी अस्थायी रूप से प्रतिवादी प्रश्नगत् सम्पत्ति प्राचीन श्री राम मंदिर भोपतवाला हरिद्वार का मंहत एवम् प्रबंधक बिना वादी संस्था के अनुमोदन के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से नियुक्त न करें ना करावें। जानकारी देने के दौरान महामण्डल के मंत्री किशनदास जी महाराज, कोषाध्यक्ष महंत गणेश दास जी महाराज,महंत प्रेम नारायण दास भी मौजूद रहे।
