कंप्यूटर ऑपरेटर से ‘पत्रकार’ बनने की होड़, अखबार और न्यूज पोर्टलों की भरमार; पत्रकारिता के मूल सरोकार पीछे समाचारों से ज्यादा दिखावे पर जोर, जिम्मेदार पत्रकारिता के सामने खड़ी हो रही नई चुनौती

राष्ट्रीय

आजकल हर शहर में अखबार और न्यूज पोर्टल की बढ़ती संख्या ने सूचना के प्रसार को भले ही आसान बनाया हो, लेकिन इसके साथ पत्रकारिता की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। तकनीक के दौर में कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट की उपलब्धता ने समाचार तैयार करना और प्रकाशित करना बेहद आसान कर दिया है। परिणाम यह है कि अब पत्रकारिता के बुनियादी प्रशिक्षण, समाचार संकलन, तथ्य-जांच और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों की समझ के बिना भी बड़ी संख्या में लोग अखबार और न्यूज पोर्टल संचालित करने लगे हैं।
स्थिति यह है कि कई स्थानों पर समाचार संकलन और रिपोर्टिंग की जगह सोशल मीडिया की पोस्ट को ही समाचार का रूप देकर प्रकाशित किया जा रहा है। प्रेस विज्ञप्तियों को बिना तथ्य-जांच के प्रकाशित करना, एक ही खबर को अलग-अलग शीर्षकों के साथ बार-बार चलाना और वायरल सामग्री को खबर मान लेना आम होता जा रहा है। इससे पाठकों तक सही, संतुलित और प्रमाणित जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रभावित होती है।
पत्रकारिता सिर्फ कंप्यूटर चलाने का का नहीं
पत्रकारिता का अर्थ केवल कंप्यूटर पर खबर टाइप करना या न्यूज पोर्टल पर सामग्री अपलोड करना नहीं है। एक पत्रकार को घटनास्थल तक पहुंचकर तथ्यों की पड़ताल करनी होती है, संबंधित पक्षों से बात करनी होती है, दस्तावेजों की जांच करनी होती है और समाचार को निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना होता है।
आज तकनीकी दक्षता निश्चित रूप से पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन तकनीक पत्रकारिता का विकल्प नहीं हो सकती। समाचार लिखने के लिए भाषा ज्ञान के साथ-साथ समाचार-बोध, तथ्य-जांच, कानूनी समझ, सामाजिक जिम्मेदारी और निष्पक्ष दृष्टिकोण भी आवश्यक हैं।
संख्या बढ़ी, लेकिन सरोकार कहां हैं?
अखबार और न्यूज पोर्टल बढ़ने से पाठकों के पास समाचार के अधिक विकल्प उपलब्ध हुए हैं। लेकिन सवाल यह है कि इनमें से कितने संस्थान वास्तव में जनता की समस्याओं को अपनी प्राथमिकता बनाते हैं?
स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जल निकासी, पर्यावरण, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों पर गंभीर पड़ताल करने वाली पत्रकारिता की जरूरत आज पहले से कहीं अधिक है। इसके बजाय यदि पूरा ध्यान केवल सरकारी कार्यक्रमों, नेताओं के बयान, सोशल मीडिया पोस्ट और फोटो प्रकाशित करने तक सीमित हो जाए तो पत्रकारिता का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ता है।
पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाना जरूरी
पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए समाचार संस्थानों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनकी विश्वसनीयता है। अखबार या न्यूज पोर्टल चलाने वाले प्रत्येक व्यक्ति और संस्था को यह समझना होगा कि पाठक का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है।
जरूरत इस बात की है कि पत्रकारिता में आने वाले नए लोगों को समाचार लेखन, तथ्य-जांच, मीडिया कानून, आचार-संहिता और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों का प्रशिक्षण मिले। साथ ही पाठकों को भी खबर और प्रचार के बीच अंतर समझना होगा।
कंप्यूटर ऑपरेटर होना तकनीकी योग्यता हो सकती है, लेकिन पत्रकार होना सामाजिक जिम्मेदारी है। अखबार निकालना या न्यूज पोर्टल चलाना आसान हो सकता है, पर विश्वसनीय पत्रकारिता करना आज भी उतना ही कठिन और जिम्मेदारी भरा काम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *