मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में गीता जयंती 2025 से अनवरत चल रहे दैनिक गीता ज्ञान यज्ञ के 165 वें दिन की आहुति डाली गई

उत्तराखंड धर्म हरिद्वार

मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र द्वारा गीता मनीषी महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के आविर्भाव दिवस पर गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में विश्व मंगल महायज्ञ संपन्न 

कुरुक्षेत्र।

मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र द्वारा गीता मनीषी महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के आविर्भाव दिवस पर लोक मंगल के निमित्त गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में मिशन द्वारा विगत गीता जयंती 2025 से अनवरत चल रहे दैनिक गीता ज्ञान यज्ञ के 165 वें दिन के उपलक्ष्य में विश्व मंगल महायज्ञ संपन्न हुआ। विश्व मंगल महायज्ञ में कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद विद्यालय के आचार्य नरेश जी के मार्गदर्शन में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों एवं ब्रह्मचारियों द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता सस्वर गीता के श्लोकों का उच्चारण कर विश्व के निमित्त यज्ञ में आहुति प्रदान की। विश्व मंगल महायज्ञ में ज्योतिसर तीर्थ एवं सरोवर की पूजा की गई। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा मातृभूमि सेवा मिशन लोक सेवा का एक महायज्ञ है, जो गीता के निष्काम कर्म योग को आत्मसात कर जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित है। गीता मनुष्य को अवसाद से आनंद की यात्रा की ओर ले जाती है। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने गीता जन्म स्थली ज्योतिसर में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा विगत गीता जयंती 2025 से अनवरत चल रहे दैनिक गीता ज्ञान यज्ञ के 165 वें दिवस की आहुति प्रदान की और मिशन के इस पहल की सराहना की। मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद को उनके जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में अंगवस्त्र एवं स्मृतिचिन्ह भेंट किया। डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत का वह कालजयी उपदेश है, जो कर्म, ज्ञान और भक्ति का समन्वय करते हुए जीवन जीने की कला सिखाता है। यह न केवल आध्यात्मिक ग्रंथ है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मविश्वास, जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने का सबसे उत्कृष्ट मार्गदर्शन करने वाला ग्रन्थ है। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य, विद्यार्थी, ब्रह्मचारी एवं अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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