ग्रस्तोदय खग्रास चंद्रग्रहण 08 नवंबर मंगलवार कार्तिक दिवा पूर्णिमा पर लगेगा, राशियों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव जानिए

उत्तराखंड

यह ग्रस्तोदय खग्रास चंद्रग्रहण 08 नवंबर मंगलवार कार्तिक दिवा पूर्णिमा मंगलवार के दिन दिखाई देगा,इस चंद्रग्रहण के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के प्रधान ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया भूलोक पर यह ग्रहण दोपहर 02 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगा और शाम 06 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण भारत में सवर्त्र दिखाई देगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह ग्रहण भरणी नक्षत्र और मेष राशि में घटित होगा।

जम्मू कश्मीर में यह ग्रहण 08 नवंबर मंगलवार शाम 05 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा और इस दिन शाम 06 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगा।

इस चंद्रग्रहण ग्रहण ऐसे समझे :

जम्मू कश्मीर में ग्रहण भारतीय स्टैं.टाइम्स 08 नवंबर 2022 ई.के अनुसार इस प्रकार रहेगा :

ग्रहण (प्रारंभ) शाम 05 बजकर 30 मिंट से

ग्रहण समाप्त शाम 06 बजे 20 मिंट पर

जम्मू कश्मीर में ग्रहण का सूतक काल 08 नवंबर मंगलवार 2022 सुबह 08 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा।

ग्रहण का फल : सागरो में उपद्रव होगा,अग्निकांड, चोरी भय का वातावरण होगा, फसलों का नुकसान, राजनेताओं को परशानियों का सामना करना होगा, जन हानि होगी, चोरों, पापी लोगों एवं लेखकों को कष्ट होगा, धान्यादि के मूल्यों में वृद्धि होगी, प्राकृतिक प्रकोपोंसे हानि होगी।

भारत के अलावा यह खग्रास चन्द्रग्रहण उत्तरी अमेरिका ऑस्ट्रेलिया एशिया दक्षिण अमेरिका तथा प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। इस ग्रहण की खग्रास आकृति उत्तर पश्चिमी कैनेडा में भी दिखाई देगी। इस चन्द्रग्रहण का आरम्भ चन्द्रास्त के समय अर्जेंटीना के पश्चिमी क्षेत्रों, चिल्ली , बोल्विया , ब्राजील के पश्चिमी क्षेत्रों तथा एटलांटिक महासागर में दिखाई देगा।जबकि भारत ,पाकिस्तान , अफगानिस्तान,उज़्बेकिस्तान तथा पूर्वी रूस में चन्द्रोदय के समय इस ग्रहण की समाप्ति दृश्य होगी।

ग्रहण का राशियों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव,जानिए।

मेष:- शरीर को कष्ट, चोट का भय एवं धन नष्ट होगा।

वृष:- धन नष्ट होगा एवं संकट से जूझना पड़ेगा।

मिथुन :- धन का लाभ एवं सुख की प्राप्ति होगी।

कर्क :- भय, कष्ट, रोग और संघर्ष करना होगा।

सिंह :- संतान संबंधी चिंताएं होगी।

कन्या :- धन खर्च अधिक होगा, शत्रु एवं दुर्घटना भय होगा।

तुला :- पति पत्नी को कष्ट होगा।

वृश्चिक :- धन की हानि होगी, रोग, चिन्ता एवं कार्यों में देरी होगी।

धनु :- धन अधिक खर्च होगा एवं भाग दौड़ अधिक करनी अधिक होगी

मकर :- कार्यों में सफलता एवं धन लाभ होगा।

कुंभ :- प्रगति होगी, उत्साह बढ़ेगा एवं सफलता प्राप्त होगी।

मीन :- शत्रु भय एवं धन हानि अधिक यात्रा करनी होगी।

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि ,ग्रहण के सूतक और ग्रहणकाल के दौरान कुछ कार्यों को न करे ,ग्रहण काल में सबसे ज्यादा सावधानी गर्भवती महिलाओं को रखनी चाहिए, इस दौरान वे सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं और गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण काल का असर विपरीत पड़ सकता है।आइए जानें कि गर्भवती महिलाएं क्या सावधानी बरतें,गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में एक नारियल अपने पास रखें। इससे गर्भवती महिला पर वायुमंडल से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं पड़ेगा,गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए,शरीर पर तेल ना लगाय,बाल न बांधे,दांत साफ ना करें,घर से बाहर न निकलें ग्रहण के समय भोजन करना, भोजन पकाना, सोना नहीं चाहिए, सब्जी काटना, सीना-पिरोना आदि से बचना चाहिए, उन पर चंद्रमा की छाया बिलकुल न पड़े इस बात का ध्यान रखें,नाखुन ना काटे, बाल ना काटे,भोजन न करें, सहवास न करें, झूठ न बोलें,निद्रा का त्याग करें,मल,मूत्र ना करे, चोरी न करें, गाय,भैंस का दूध नहीं निकालना चाहिए,आम जनता को भी इन सब बातों को नहीं करना चाहिए,किसी भी प्रकार के पाप कर्म से दूर रहें और ग्रहण काल में अपने इष्टदेव ,शिव या गायत्री मंत्र का जाप करते रहें। ग्रहण के प्रभाव के चलते सूतक काल से ही मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।

ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुंतुद नरक में वास करता है।

घर में रखे हुए पानी, अनाज, दूध दही, अचार अगर में कुशा डाल देनी चाहिए, इससे पानी एवं दूषित नहीं होता है,कुशा ना हो तो तुलसी का पौधा शास्त्रों के अनुसार पवित्र माना गया है। वैज्ञानिक रूप से भी यह सक्षम है, इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट आसपास मौजूद दूषित कणों को मार देते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थ में डालने से उस भोजन पर ग्रहण का असर नहीं होता।

ग्रहण के समय पति और पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। इस दौरान यदि गर्भ ठहर गया तो संतान विकलांग या मानसिक रूप से विक्षिप्त तक हो सकती है।

ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, तप, पूजा पाठ, मन्त्र, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि करना बहुत लाभकारी रहता है।

चंद्रमा के शुभ प्रभाव प्राप्त करने हेतु चंद्रमा के वैदिक मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जप करना चाहिए।

ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से घर को बचाने के लिए ग्रहण से एक दिन पहले घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर में घी मिलाकर ॐ या स्वास्तिक का चिह्न बनाये ।

बाजार में गमलो को रंगने के लिए,रंगोली बनाने के लिए गेरू मिलता है, ग्रहण से पहले घर के मुख्य द्वार के पास , घर की छत पर एवं घर के आँगन में गेरु के टुकड़े बिखेर दें, और ग्रहण के बाद इसे झाड़ू से बटोर कर घर के बाहर फेंक दे। इस उपाय से घर पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है ।

ग्रहणमोक्ष होने पर सोलह प्रकार के दान, जैसे अन्न, जल, वस्त्र, फल, दूध, मीठा, स्वर्ण, चंद्रमा से संबंधित लाल वस्तुएं जैसे चांदी, चावल, दूध, आटा, चावल , चीनी , देसी घी आदि का दान जो भी संभव हो सभी मनुष्यों को अवश्य ही करना चाहिए।

ग्रहण के समय राशि अनुसार करें ये दान, मिलेगा लाभ।

मेष राशि के लोगों को गुड़, मूंगफली, तिल,तांबा की वस्तु, दही का दान देना चाहिए।

वृषभ राशि के लोगों के लिए सफेद कपड़े,चांदी और तिल का दान करना उपयुक्त रहेगा।

मिथुन राशि के लोग मूंग दाल, चावल,पीला वस्त्र, गुड़ और कंबल का दान करें।

कर्क राशि के लोगों के लिए चांदी, चावल,
सफेद ऊन, तिल और सफेद वस्त्र का दान देना उचित है।

सिंह राशि के लोगों को तांबा,गुड़, गेंहू,गौमाता का घी, सोने और मोती दान करने चाहिए।

कन्या राशि के लोगों को चावल, हरे मूंग या हरे कपड़े का दान देना चाहिए।

तुला राशि के जातकों को हीरे, चीनी या कंबल,गुड़, सात तरह के अनाज का देना चाहिए।

वृश्चिक राशि के लोगों को मूंगा, लाल कपड़ा,लाल वस्त्र, दही और तिल दान करना चाहिए।

धनु राशि के जातकों को वस्‍त्र, चावल, तिल,पीला वस्त्र और गुड़ का दान करना चाहिए।

मकर राशि के लोगों को गुड़,कंबल, और तिल दान करने चाहिए।

कुंभ राशि के जातकों के लिए काला कपड़ा, काली उड़द, खिचड़ी,कंबल, घी और तिल का दान चाहिए।

मीन राशि के लोगों को रेशमी कपड़ा, चने की दाल, चावल,चना दाल और तिल दान देने चाहिए।

“:पुत्रजन्यनि यज्ञेश च तथा सङ्क्रमणे रवे ।
राहोश्च दर्शने कार्यं प्रशस्तं नान्यथा निशि ।। ” वशिष्ठ।।
अर्थात पुत्र की उत्पत्ति, यज्ञ ,सूर्य संक्रांति, सूर्य-चंद्रमा ग्रहण में रात में भी स्नान करना चाहिए।

यह चंद्र ग्रहण कार्तिक पूर्णिमा को घटित हो रहा है इसीलिए जहां कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का महत्त्व और भी विशेष हो जाता है।

-महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य।प्रधान श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट पंजीकृत, ठठर रायपुर दोमाना जम्मू कश्मीर।
संपर्क सूत्र:-7006711011,9796293195,9898293195.ईमेल आईडी rohitshastri.shastri1@gmail.com

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